Maheshwari Chauhan wins bronze at Asian Shotgun Championship

Shooter Maheshwari Chauhan clinched a bronze medal in the women's skeet event of the Asian Shotgun Championship in Astana, Kazakhstan, last evening. The 21-year-old shot 40 in the finals to hand India its first women's skeet individual medal at a top international competition in Astana. Maheshwari made it to the knockouts by topping the qualification round with a score of 6875 on 11th August. 
She led a group of six shooters into the final round. Among them was teammate Rashmmi Rathore who qualified sixth with a score of 64. It was a quality top six in the final rounds having the likes of Olympic finalists and World Cup Gold medalists Meng Wei of China and Sutiya Jiewchaloemmit of Thailand among others. Meng is currently ranked four in the world while Sutiya is ranked fifth.
Maheshwari Chauhan is from Jalore district of Rajasthan and we are pround of her success

सांवरलाल जाट - किसान परिवारों ने अपना बेटा खो दिया

प्रो सांवरलाल जाट असल मायने में गुदड़ी के लाल थे। राजस्थान के एक साधारण किसान परिवार में जन्में सांवरलाल ग्रामीणों, गरीबों एवं किसानों के सच्चे मसीहा ही नहीं, भारतीय राजनीती में अपने सादे जीवन और जमीन से जुड़े होने के कारण एक श्रेष्ठ मिसाल थे। सांवरलाल जाट एक बहुत साफ़गो इंसान थे, एक किसान और ज़मीन से जुड़े नेता। उन्हें बेईमान राजनेताओं जैसी धूर्त हसीं एवं बेईमानी भरी चालाक भाषा नहीं आती थी। प्रोफेसर सांवरलाल जाट ने जीवन की शुरुआत बतौर कॉलेज व्याख्याता के रूप में की। मौजूदा फ़ेसबुक, ट्विटर, सूट-बूट एवं लेनिन के कड़क सफ़ेदी लिए महंगे वस्त्रों  वाले नेताओं के बीच बिना किसी सूट-बूट या डिज़ाइनर राजस्थानी वर्दी के सांवरलाल जाट ठेठ राजस्थानी ग्रामीण धोती साफे में रहने वाले गुदड़ी के लाल सही मायनों में आजीवन एक आम किसान ही थे। वे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे, लेकिन एक किसान की तरह जिए और ऐसे ही राजनीति की। वे कभी चबा-चबाकर नहीं बोले एवं यही उनके जीने की शैली रही।
सांवरलाल जाट का राजनीतिक सफर
साँवरलाल जाट का जन्म 1 जनवरी 1955 को राजस्थान के अजमेर जिले के गोपालपुरा गाँव में हुआ था। उन्होंने वाणिज्य में स्नातकोत्तर करने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षक का कार्य भी किया था। वे सोहलवीं लोकसभा में अजमेर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद थे। 20 दिसम्बर 2013 को उन्होंने राजस्थान के केन्द्रिय मंत्री की शपथ ग्रहण की। सांवर लाल का निधन 9 अगस्त 2017 को राजधानी दिल्ली में एक अस्पताल में हो गया। जब सांवरलाल जाट केंद्र में चमचमाते मोदी सरकार के मंत्रिमंडल से हटाए और वसुन्धरा सरकार ने उन्हें राजस्थान किसान आयोग का अध्यक्ष बनाया, तब उन्होने किसान आयोग को असल में किसानों की जगह बनाई अन्यथा यह केवल सरकारी बाबुओं का एक किसान प्रवेश निषेध कार्यालय ही बनकर रह गया था। सांवरलाल जाट के नवीन राजस्थान किसान आयोग दफ्तर की फिजा ही अलग थी यहाँ आप साफा पहने हुए किसान भी आसानी से देख सकते थे जिनमें हर कौम के किसान थे। अब शायद राजस्थान किसान आयोग फिर से ग्रामीण किसानों की पहुँच से दूर हो जाये तो कोई नई बात नहीं होगी।
किसान परिवारों ने अपना बेटा खो दिया
राजस्थान के किसान परिवारों ने निश्चित ही सांवरलाल जाट के रूप में अपना एक बेटा खो दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष व सांसद श्री सावंरलाल जाट के निधन के साथ ही राजस्थान के किसानों की एक आवाज सदा के लिए बंद हो गयी। अगर सावंरलाल जी जाट के परिवार जनों के बाद आज सबसे अधिक क्षुब्ध है तो वो हैं, राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के किसान जिनका सरकार के साथ एक संवाद पुल ख़त्म हो गया। सावंरलाल जाट दलगत राजनीती से परे सदैव किसानों एवं ग्रामीणों के हितेषी रहे है। सावंरलाल जाट की जयपुर से गोपालपुरा, अजमेर के बीच श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा किसानों एवं ग्रामीणों का जनसमूह उनके प्रति अपनेपन एवं प्यार का सबूत है। अजमेर संभाग के ग्रामीण क्षेत्र में 9 अगस्त को अचानक सुबह-सुबह सभी टीवी खोलते नज़र आये हमने में सही जानकारी के लिए टीवी खोला लेकिन वहां बीजेपी-कांग्रेस की गुजरात राज्यसभा के लिए खरीद-फरोख्त खबरें ही सरपट दौड़ रही थी, कुछ समय बाद शायद कोई प्रेस विज्ञप्ति के बाद ब्रेकिंग न्यूज चली लेकिन गावों में किसानों को आधे घंटे पहले ही पता चल गया था कि आज किसान परिवारों ने अपना एक बेटा खो दिया है या यूँ कहें राजस्थान की राजनीति में किसान राजनीति का अंतिम जिम्मेदार योद्धा अब नहीं रहा। 
दलित राजनीती की नई डगर 
एक सबसे बड़ी सीख अगर भाजपा एवं अन्य पार्टियों के नेताओं एवं आलाकमान को सांवरलाल जाट से लेनी हो तो वो है दलित राजनीती, जिसे राजनीतिक पार्टियां केवल नारों एवं जुमलों से साधने का प्रयास कर रही है। सांवरलाल जाट का एक प्रमुख वोट बैंक था दलित समाज जिसके वे बिना किसी नारे के सबसे नज़दीक थे या यों कहे उनके प्रमुख विश्वासपात्र दलित समाज के मित्र एवं कार्यकर्त्ता ही थे। अगर किसी राजनेता को सही मायने में दलित समाज का भला करना है तो वो फोटो-सैशन, जुमलों एवं बाबासाहेब अम्बेडर जी के गुणगान करके नहीं दलित समाज के साथ आत्मीयता के सम्बन्ध बनाने एवं साथ चलने से होता है। वे एक जाट थे एवं 36 कौम के सर्वमान्य नेता थे।  यह हरयाणा बीजेपी के कुछ संकीर्ण मानसिकता के साथ 35 कौम के नारे देने वाले छुटभैये नेताओं के लिए एक सीख भी है। 
राजनेताओं को सीख 
वे एक सज्जन और स्पष्टवादी इनसान थे साथ ही सरल व्यव्हार एवं साफ़गोई से बात रखने वाले राजनेता थे। वे अहम् मुद्दों पर आजकल के शातिर राजनेताओं की तरह धूर्तता से झूठ बोलने, भ्रामक प्रचार एवं सवालों से कन्नी काटकर बचने वाले राजनेताओं की तरह नहीं थे, आप उनसे जब चाहे मिल सकते थे एवं एक सच्चा जवाब पा सकते थे। जाति, धर्म एवं सांप्रदायिक ताकतें सांवरलाल जाट से स्वतः ही खौफ खाते थे, वे सही मायने में सबका साथ, सबका विकास को बिना किस जुमले एवं प्रचार के जीवन में अपनाने वाले व्यक्ति थे। अपने 30 साल से अधिक के राजनीतिक सफर में वे एक सच्चे एवं ईमानदार राजनेता थे, वरना आजकल तो छुटभैये नेता भी सफेदपोश बन अवैध खनन, जमीन हड़पना, कब्जे करना एवं धार्मिक वैर-वैमन्य फैलाना सरीखे कार्यों को राजनीती की पहली सीढ़ी समझते हैं जो निश्चित ही निंदनीय हैं एवं राजनेताओं को जनता से दूर ले जा रही है। आशा करते हैं, इस माटी के लाल सांवरलाल से सभी राजनेता कुछ सबक लेंगें। 

प्रो. सांवरलाल जाट का अंतिम संस्कार मुख्यमंत्री ने प्रो. जाट को दी अंतिम विदाई

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे, केन्द्र व राज्य के कई मंत्रियों तथा हजारों लोगों ने गुरूवार को नम आंखों से पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष प्रो. सांवरलाल जाट को अंतिम विदाई दी। प्रो. जाट के पैतृृक गांव अजमेर के गोपालपुरा में राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। उनका बुधवार को नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया था। श्रीमती राजे ने प्रो. जाट के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और दु:ख की इस घड़ी में उन्हें सम्बल प्रदान करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रो. जाट के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ओर से राज्यसभा सांसद श्री भूपेन्द्र यादव ने पुष्पचक्र अर्पित किया।
किसान नेता के रूप में विख्यात रहे प्रो. जाट का पार्थिव शरीर गुरूवार को जयपुर से उनके पैतृक गांव गोपालपुरा लाया गया था। इस बीच रास्ते में दर्जनों स्थानों पर जन समूह ने अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर उन्हें विदाई दी। गोपालपुरा में उनके निवास पर धार्मिक रीति रिवाज के बाद पार्थिव शरीर को गांव में ही श्मशान स्थल पर लाया गया। जहां हजारों लोगों ने सांवरलाल अमर रहे,  जब तक सूरज चांद रहेगा, सांवरलाल तेरा नाम रहेगा, अजमेर का एक ही लाल सांवरलाल-सांवरलाल जैसे नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। प्रो. जाट के पार्थिव शरीर को उनके पुत्र कैलाश और रामस्वरूप सहित अन्य परिजनों ने मुखाग्नि दी। मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने गोपालपुरा पहुंचकर प्रो. जाट की धर्मपत्नी श्रीमती नर्बदा देवी से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। 

Former Union minister Sanwarlal Jat passes away at 62

Sanwar Lal Jat (62), former Union Minister and BJP MP from Ajmer, passed away at 6.15 a.m. on Wednesday at the All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) in New Delhi, a senior official of the hospital said. According to doctors at the AIIMS, Mr. Jat had a cardiac arrest, which caused a damage to his brain and he was on ventilator. Mr. Jat had served as Minister of State for Water Resources in the Narendra Modi government.
Prime Minister Modi condoled with the passing away of the leader. “Anguished by the demise of MP & former Union Minister, Shri Sanwar Lal Jat. This is a big loss for the BJP & the nation. My condolences,” he tweeted. Mr. Modi also said Mr. Jat worked extensively for the wellbeing of villages and farmers. The BJP MP collapsed during a meeting chaired by party president Amit Shah in Jaipur last month. He was admitted to the Intensive Care Unit (ICU) of Sawai Man Singh Hospital there and later airlifted to the AIIMS.

फेस्टिवल ऑफ एजूकेशन 2018 उदयपुर में होगा

आगामी फेस्टिवल ऑफ एजूकेशन अगले वर्ष 2018 में उदयपुर में आयोजित किया जायेगा।  शिक्षा मंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने फेस्टिवल ऑफ एजूकेशन के विभिन्न सत्रों में हुये संवाद में अन्य देशों से आये प्रतिभागियों जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य जनों का आभार जताते हुए कहा कि इस उत्सव के दूरगामी परिणाम आयेंगे। 
उन्होंने कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जिसने शिक्षा से जुड़े इस ग्लोबल उत्सव की पहल की है। श्री देवनानी ने मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा कि बदलते हुए दौर में राजस्थान शिक्षा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा। 

Rahul Gandhi visit flood-hit Jalore in Rajasthan

Congress vice president Rahul Gandhi on Friday met people in Rajasthan’s flood-hit areas and claimed that the relief efforts of the state government had not reached all the affected places. Gandhi conducted an aerial survey of the affected areas in Barmer, Jalore, Sirohi and Pali and met people in Dedwa, Dawal, Amli, Hadecha and Kachel villages, whom he assured all help. The government’s responsibility was to provide succour to the people but there were no proper relief at some places, the Congress vice president said, in an apparent attack on the BJP-led state government, in Jalore. Normal life in Jalore, Pali and Sirohi districts has been badly affected due to heavy downpour.
Several shelter camps have been set up by the district administration and other social organisations in Jalore and Barmer where food and water are being supplied The Congress leader is accompanied by PCC president Sachin Pilot, former chief minister Ashok Gehlot and other leaders and party workers. 

Rajasthan CM visits flood-affected Regions

Chief Minister Smt. Vasundhara Raje has said that the state government would plan and propose permanent solution to reduce damages due to floods in the affected regions. She said that in certain districts there were regions with frequent tendency of floods keeping life out gear and causing damages to the property. A permanent solution would be provided to save regions, she said talking to journalists in Jalore and Sirohi on Monday. Smt. Raje said that soon after assessing the flood-like situation in districts with heavy rains, she dispatched the in-charge ministers and secretaries to affected regions. They were continuously meeting the flood-victims and helping in relief and rescue operations. 
The CM said that the local district administration, police, NDRF, SDRF, Army, CRPF and Homeguards were carrying out day and night relief and rescue works with full cooperation to each other. From wherever any information was received for persons trapped in flood waters or with no food and other essentials, the relief workers were responding promptly to help them. Till date, helicopters of Indian Air Force had saved 42 lives, while more than 11,000 persons were taken to safe places across the state.  During a review of flood situation and relief works, Chief Minister directed the officials to distribute food items and other essentials of civil supplies in the 'offline' mode without POS machines.

अजीत सिंह शेखावत बने राजस्थान के नए पुलिस महानिदेशक (DGP)

अजीत सिंह शेखावत 31 जुलाई को राजस्थान के नए पुलिस महानिदेशक (DGP) बने हैं। इस पद के लिए ये सरकार की पहली पसंद थे। हालांकि, इसी नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। सोमवार को मनोज भट्ट रिटायर हुए तो शाम तक सरकार ने प्रदेश की पुलिस को नया मुखिया दे दिया।  नए डीजीपी के लिए डीजी जेल अजीत सिंह, सुधीर प्रताप सिंह, ओपी गल्होत्रा के नाम चर्चा में थे। डीजीपी जेल अजीत सिंह शेखावत इससे पहले डीजी जेल थे। अजीत सिंह 1982 बैच के हैं अधिकारी हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि राजपूत कम्युनिटी में भाजपा को लेकर नाराजगी है, उस नाराजगी को दूर करने और राजनीतिक लाभ के लिए अजीत सिंह शेखावत को मौका दिया जा सकता है औऱ अब उन्हें डीजीपी बना दिया गया।
वर्तमान महानिदेशक पुलिस श्री मनोज भट्ट भी 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए, इस अवसर पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित भव्य समारोह में परम्परागत रस्म अदा करते हुए पुलिस अधिकारियों एवं जवानों ने उनकी कार को रस्सों से खींचकर भावभीनी विदाई दी।  पुलिस महानिदेशक ने अपने विदाई समारोह में उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस पर देश प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मुझे गर्व है कि पुलिस महानिदेशक के पद पर रहते हुए मैंने अपने दायित्वों को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाने का प्रयास किया।  उन्होंने अपनी 36 साल की सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि पुलिस विभाग के सभी अधिकारियों ने मेरे साथ हमेशा दोस्ताना एवं सहयोगात्मक व्यवहार निभाया है,इसके लिये मै उनका हद्य से आभारी हूॅं। उन्होंने राजस्थान पुलिस के इतिहास और परम्परा को गौरवशाली बताया।